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पत्थरों में कैद सब

Sunil Gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उस आलीशान घर में
        
                                                    
                            
झूलते रेशमी पर्दे
कितने मुलायम
कितने झीने

संगमरमरी गमलों पर
फूल और तितलियां

वो एसी की महीन
मुलायम हवाएं

वो दूधिया जलते बल्ब
और शीतल फर्श
जगमगाती सीढ़ियां
सब नर्म
सब कोमल
जैसे रुई के फाहे हैं
जगह-जगह पर।

पर
ऐसा कुछ भी नहीं यहां
पत्थरों में कैद सब कुछ
यहां तक कि
सीने में धड़कते दिल भी
सख्त है
पत्थरों की तरह
सर्द भी
-सुनील गुप्ता
10 महीने पहले
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