विज्ञापन

तुम सुनोगे तो मैं कहीं से भी कहदूँ

sumit singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            है नहीं कुछ ऐसा तुम बस मुझे ही दिखो
        
                                                    
                            
होता तो हर रोज वो चादर ओढ़ लेता

काश तू भी साथ होता इस ढलती शाम में
अच्छी सी खुद खुशी करके खुदा से नाता जोड़ लेता

तुम सुनोगे तो मैं कहीं से भी कहदूँ
समेटकर इस हवा को तुम्हारी और मोड देता

जरूरी है ये जाँ भी तुम्हें चाहने के लिए
रखा ही क्या है ये जहाँ कब का छोड़ देता

तुमपर तुम्हारे जुल्फ ही खूब लगते है वरना
ये आफताब क्या मैं सितारे भी तोड़ लेता

 
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all