विज्ञापन

जगाने आई

Sudhir Khatri

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जगाने आई
        
                                                    
                            
राहों में जो,
प्रेम जगाने आई,

गुल सी आंखों में,
ये कहती सहनाई,

जलवों की प्रेम पवन,
प्राची की साज भरी,
आंख भ्रमण कर,
मधुबन में आई,

ये मधुबन की अंगड़ाई,
ये मधुबन में ,
क्रीड़ा चंचल कर आई,

जो आंखों में कर,
क्रीड़ा पवन ,
उद्वेलित कर आई,

जो बह रही,
पलक पर छल-छल,
किसने चोट मन पर लगाई/कवि खत्री भेल

मुक्त:- थक गया हूं,
तेरी चाकरी से इश्क,
मुनाशिब होगा,
तेरे जलवों का,
मिज़ाज बता दे/
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all