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जगाने आई

                
                                                         
                            जगाने आई
                                                                 
                            
राहों में जो,
प्रेम जगाने आई,

गुल सी आंखों में,
ये कहती सहनाई,

जलवों की प्रेम पवन,
प्राची की साज भरी,
आंख भ्रमण कर,
मधुबन में आई,

ये मधुबन की अंगड़ाई,
ये मधुबन में ,
क्रीड़ा चंचल कर आई,

जो आंखों में कर,
क्रीड़ा पवन ,
उद्वेलित कर आई,

जो बह रही,
पलक पर छल-छल,
किसने चोट मन पर लगाई/कवि खत्री भेल

मुक्त:- थक गया हूं,
तेरी चाकरी से इश्क,
मुनाशिब होगा,
तेरे जलवों का,
मिज़ाज बता दे/
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2 महीने पहले

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