कल फिर उनसे सामना होगा
कल फिर मुझे आंख झुकानी होंगी
कल फिर वो आयेंगे बहार बन कर
कल फिर मुझे मुस्कुराना होगा
कल फिर चिराग़ जलेंगे दिल में
कल फिर मुझे उन्हें बुझाना होगा
कल फिर महफिलें सजेगी उनकी
कल फिर मुझे खामोश रह जाना होगा
कल फिर वो आयेंगे मेरे पास चल कर
कल फिर मुझे उनसे कुछ दूर चला जाना होगा
कल फिर मिलेंगे अंधेरे में हम तुम
कल फिर यूं हीं घर लौट जाना होगा
कल फिर कुछ पन्ने रंगीन करूंगा
कल फिर शब्दों का रिश्ता निभाना होगा
– सुधाकर कुमार राय