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कल फिर कुछ होगा!

Sudhakar Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कल फिर उनसे सामना होगा
        
                                                    
                            
कल फिर मुझे आंख झुकानी होंगी

कल फिर वो आयेंगे बहार बन कर
कल फिर मुझे मुस्कुराना होगा

कल फिर चिराग़ जलेंगे दिल में
कल फिर मुझे उन्हें बुझाना होगा

कल फिर महफिलें सजेगी उनकी
कल फिर मुझे खामोश रह जाना होगा

कल फिर वो आयेंगे मेरे पास चल कर
कल फिर मुझे उनसे कुछ दूर चला जाना होगा

कल फिर मिलेंगे अंधेरे में हम तुम
कल फिर यूं हीं घर लौट जाना होगा

कल फिर कुछ पन्ने रंगीन करूंगा
कल फिर शब्दों का रिश्ता निभाना होगा
– सुधाकर कुमार राय
एक वर्ष पहले
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