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कहाँ मैं ढूंढूं राह हरि ।

Sudha Dubey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तव चरण कमल की चाह हरि,
        
                                                    
                            
अब कहां मैं ढूंढूं राह हरि।
निज भक्तों के मन को बहलाने,
कोई अद्भुत लीला दिखलाने
हे लीलाधर फिर आओ न।
सर पर रखो दया का हाथ हरि । तव चरण कमल की...
न छप्पन भोग न मेवा है,
न पूजा- व्रत- तप सेवा है ,
आके रुखी सूखी खाओ न,
कहाँ पाऊं माखन का स्वाद हरि। तव चरण कमल...
न साथी सखा हमारे हैं,
हम बैठे तेरे सहारे हैं,
हम दीन -दुःखी अनाथों को,
आके अब तो कर दो सनाथ हरि। तव चरण कमल..
जाने कितनों का उद्धार किया,
एक पट के बदले अपार दिया,
हे द्रुपद सुता पत रखवाले,
जग की भी बचालो लाज हरि। तव चरण...
क्या लिखूँ तुम्हारी मैं गाथा,
न शब्द है न ही परिभाषा,
स्वरचित सुधा के शब्दों में शारद का,
रहे वास ये दो आशीर्वाद हरि । तव चरण कमल की चाह हरि ,
अब कहां मैं ढूंढूं राह हरि, ।।
एक घंटा पहले
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