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एक देवी मेरे मन मंदिर में रहती है।

Sudha Dubey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक जीती जागती देवी मेरे मन मंदिर में रहती है
        
                                                    
                            
मैं तो मम्मी कहती हूँ पर दुनिया अम्मा माई कहती है।

रख कोख में उसने पाला मुझको रक्त से अपने सींचा था,
पर गोद में उसके लेटे मैंने कई बार उसके बालों को खींचा था,
ना एक अस्थि की पीर सहोगे 56 अस्थि का सहती है...
एक जीती जागती देवी मेरे मन मंदिर में रहती है...

बिन बोले मेरे दर्द समझती अपना कभी न बताती है,
चाहे जितना मैं उसे खिजाऊं पर वह न कभी सताती है,
संतति हित के लिए न जाने कितनी पूजा व्रत कर जाती है,
सही गलत है क्या है हितकर जननी ही समझाती है,
जिसकी पूजा व्रत और दुआएं साथ में मेरे चलती है...
एक जीती जागती देवी मेरे मन मंदिर में रहती है।

उम्र में चाहे बड़ी हो गई पर बच्ची हूँ अभी वह मानती है,
पर दुनियादारी में कच्ची हूँ यह बात वही बस जानती है,
हँसते चेहरे को भी देख कर दर्द मेरे पहचानती है,
अंदर से है कोमल पर संतति के लिए यम से भी लड़ती है...
एक जीती जागती देवी मेरे मन मंदिर में रहती है...

सब समझती है माँ भोली पर गिनती उसे न आती है,
एक घूंट एक कौर कह ना जाने कितने कौर खिलाती है,
ब्याह हो गया मैं भी माँ हूँ पर अभी बिटिया कह कर बुलाती है,
जब तक घर ना पहुँचती हूँ बार-बार फोन मिलाती है,
देर हो गई कब आएगी बस यही पूछती रहती है...
एक जीती जागती देवी मेरे मन मंदिर में रहती है।।
 
11 घंटे पहले
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