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याद दिल में

suckhi singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            याद दिल में कब तक सँभाले कोई,
        
                                                    
                            
ख़ाली बर्तन को कब तक खंगाले कोई।
रूह दबी है इस जिस्म-ए-लिबास में,
आकर इसमें से मुझको निकाले कोई।
-सुखप्रीत सिंह "सुखी"
 
3 घंटे पहले
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