यार तेरा जिम्मेदारियों की सूली चढ़ गया जानी
पढ़ने की उम्र थी वो जिसमें कढ़ गया जानी
जब उम्र आयी बैठकर तुझसे नजरें मिलाने की
तब आंखों भी उम्र का चश्मा चढ़ गया जानी
-सुखप्रीत सिंह "सुखी"