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केरल चलना होगा

subhash yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            यूँ तो आँधियां आएंगी
        
                                                    
                            
सैलाब आएगा
रोष भरा प्रकृति का
हर दिन
ऐसा व्यवहार आएगा
उस वक्त खड़ा होकर हमको
हिम्मत लिए लड़ना होगा
चलो केरल चलना होगा
चलो केरल चलना होगा
हाँ !खड़े घुटने भर पानी में
देखो उनकी रात को
टकटकी लगाए
उनकी एक आस को
आखिर देश अपना है
अपने लोग,
सहारा उनका बनना होगा
संग उनके जीना
आज मरना होगा
चलो केरल चलना होगा
चलो केरल चलना होगा

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले
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