फैसले बन पड़ते है
कभी ज़रूरी
फैसले !
कहीँ भी किसी
पथ पर
जब मुश्किलों के बिच
आदमी होता
फंसकर !
घिरकर तूफानों से ,
अनजान सुनी राहों से ,
या क्यों ना हो
बिच फसा मन
भँवर के घेरे में
या हो घिरा गहन
किसी अंधरे में
फैसले बन पड़ते है तब ज़रूरी
फैसले ॥
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