विज्ञापन

फैसले

subhash yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            फैसले बन पड़ते है
        
                                                    
                            
कभी ज़रूरी
फैसले !
कहीँ भी किसी
पथ पर
जब मुश्किलों के बिच
आदमी होता
फंसकर !
घिरकर तूफानों से ,
अनजान सुनी राहों से ,
या क्यों ना हो
बिच फसा मन
भँवर के घेरे में
या हो घिरा गहन
किसी अंधरे में
फैसले बन पड़ते है तब ज़रूरी
फैसले ॥




हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
7 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Kumar

4215 कविताएं

View Profile

Priyanshu Saini

1 कविता

View Profile