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निकला हूँ पहली बार

SUBHASH SHYAM SAHARSH

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            निकला हूँ पहली बार सफर पर सब आसान तो नहीं होगा
        
                                                    
                            
कुछ होंगे पराये कुछ अपने भी सब अपना तो नही होगा
चलना ही गर मेरी मंज़िल है और मंज़िल ही मेरा ठिकाना
रास्ते हों मुश्किल या आसान ये सब सोच कर क्या होगा
तुमसे पहले तुम्हारे चले हैं इसी रास्ते पर जाओ तुम भी
अभी मुझे मुश्किल होगी तुम्हारा रास्ता ज़रा आसान होगा
मेरी चाहत मेरे इरादे एक नहीं, कई सारे हैं सहर्ष गर कहूँ,
तू होगा किसी मंज़िल का, हर मंज़िल मेरा मेहमान होगा
3 घंटे पहले
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