मैं दूर खड़ा होकर तमाशा देखता हूँ
जो छोड़ गए उन्हें अपना सा देखता हूँ
कहने की बात थी हर कोई कह गया
बीते रात में दिन की परछाई देखता हूँ
आप थे आप अच्छे भले क्यों बदले
अब आपसे बदले हर नज़ारे देखता हूँ
ठहरने की बात होती रुक जाते हम तो
बिछड़े थे जहाँ हम वो रास्ता देखता हूँ।