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अच्छा तो ठीक है

Subhash saharsh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अच्छा तो ठीक है तुम्हारी ही बात करेंगे
        
                                                    
                            
सुबह क्या शाम क्या तुम्हारी ही बात करेंगे
लेकिन उसका क्या सोचो तो ज़रा नाज़नीं
बग़ैर तेरे जैसे बिन पानी के मछली मरेंगे
तोड़ देते अगर हद तोड़ना ही होता हमें
सोचा तन्हा क्यों हम सब साथ चलेंगे
मेहरबानी करके तुम तुम ही रहो तो करम
जब तुम हम हुए तो फिर हम कहाँ रहेंगे
6 घंटे पहले
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