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कभी यूँ जब चुप बाहिर जाना हुआ

Subhash saharsh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अभी अभी आया हूँ थका हुआ
        
                                                    
                            
परेशान मुरझाया बस टूटा हुआ
ज़िम्मेदारी सर पर इतनी कि बस
दौड़कर फिर जाना आना हुआ
पहले वालिदान फिर बीबी बच्चे
आख़िर में मेरा आधा खाना हुआ
कल की भाग दौड़ के ख़्याल में
कहाँ जी भर कर भी सोना हुआ
हो मुमकिन कि मौत का आना भी
कभी यूँ जब चुप बाहिर जाना हुआ
2 महीने पहले
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