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कभी यूँ जब चुप बाहिर जाना हुआ

                
                                                         
                            अभी अभी आया हूँ थका हुआ
                                                                 
                            
परेशान मुरझाया बस टूटा हुआ
ज़िम्मेदारी सर पर इतनी कि बस
दौड़कर फिर जाना आना हुआ
पहले वालिदान फिर बीबी बच्चे
आख़िर में मेरा आधा खाना हुआ
कल की भाग दौड़ के ख़्याल में
कहाँ जी भर कर भी सोना हुआ
हो मुमकिन कि मौत का आना भी
कभी यूँ जब चुप बाहिर जाना हुआ
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4 घंटे पहले

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