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फिर बताओ इस सबका ज़िम्मेदार कौन है..?

Std Maurya

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कहो तुम, मैं अंधा-बहरा हूँ
        
                                                    
                            
उन्होंने तुम्हें बाँटा और तुम बंट गए,
उन्होंने तुम्हें जाति के बंधन में बाँधा, तुम बंध गए..
जाति के आधार पर काम दिया, तुम करने लगे..
उन्होंने हल चलवाए, तुम चलाए,
नाली साफ़ कराए, तुम किए...
उन्होंने ईश्वर को बाँटा, तुम बाँटने दिए,
उन्होंने ईश्वर का डर दिखाया, तुम ईश्वर से डर गए...
उन्होंने मंदिर बनाए, तुम दान करने लगे..
उन्होंने पत्थर की मूर्ति बनाई,
तुम पूजने लगे...
अब बताओ गलती किसकी है,
उनकी या तुम्हारी?
आज भी तुम अपनी आँखों पर पट्टी बाँधे हो..
वह धर्म-मंदिर के नाम पर वोट माँगे, तुम दे दिए,
उन्होंने पैसे का लालच दिया, तुम लालच कर लिए..
उन्होंने राम मंदिर का ख्वाब दिखाया, तुम देख लिए..
उन्होंने रोज़गार की बात नहीं की, तुम पूछे नहीं,
उन्होंने हिंदू की बात की, तुम इंसानियत की तरफ देखना भूल गए,
उन्होंने इंसानियत कुचली, तुम नज़रअंदाज कर दिए...
वह तुम्हें खालिस्तानी, मुल्ला बोले, तुम चुप रहे,
उन्होंने पेट्रोल में मिलावट की, तुम चुप रहे,
उन्होंने गैस की कीमत बढ़ाई, तुम चुप रहे,
उन्होंने धर्म की चादर ओढ़ाई, तुम ओढ़ लिए..
वह एक-एक सरकारी संपत्ति बेच रहे,
तुम मौन हो,
उन्होंने रेल बेचे, एयरपोर्ट बेचे, बेच रहे धीरे-धीरे सब,
करोड़ों का घोटाला रोज़ हो रहा...
घर मजबूत नहीं बना रहे,
घर रोज़ गिर रहा..
तुम सब दो नंबर का काम देख रहे उनका,
फिर तुम चुप हो,
फिर गलत कौन—तुम या वह???
वोट चोरी के सबूत सामने हैं,
युवा कुचले जा रहे हैं,
फिर भी तुम मौन हो...
फिर बताओ इस सबका ज़िम्मेदार कौन है..?
— एस.टी.डी. मौर्य 
एक दिन पहले
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