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वक्त का परायापन।

SRISHTI

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वक्त ने मुझको कितना यूँ बेबस किया,
        
                                                    
                            
अपना समझा जिसे उसने पराया किया,
उलझने जिन्दगी की यूँ बढती रही,
पर मैं हारी नहीं और ठहरी रही ।।
वक्त ने---------------------------------------- पराया किया ।।

हर कदम पे वो इम्तिहान मेरा ले रही ,
राहें काँटे भरी मुझको यूँ दे रही,
मेरे जीवन में अमावस यूँ छाती रही,
मैंने सोचा गुजर जाएगा ये समय,
पर वो ठहरा रहा मैं भी ठहरी रही ।।
वक्त ने-------------------------------------------- पराया किया। ।

फिर भी उम्मीद का दीप जलता रहा,
जैसे नदियो की भी चाह बढती रही,
मैं ना टूटी ना संभली किसी और से,
अपने आसू स्वंय में समेटी रही,
रात कितनी भी गहरी जिंदगी की मेरी,
चांदनी बनके मैं यूँ बरसती रही ।।
वक्त ने‐-------------------------------------------- पराया किया ।।
-सृष्टि ...
एक घंटा पहले
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Suresh Kumar

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