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हृदय में पीर इतनी थी

SRISHTI

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हृदय में पीर इतनी थी , मैं मिलने आ नहीं पायी ,
        
                                                    
                            
हुआ एहसास मुझको जब तो मैं पछता नहीं पायी,
किताबो से निकलकर भी मैं इश्क को जान नहीं पाई,
खड़े थे वो मेरे खातिर, मैं मिलने जा नहीं पाई। ।
-सृष्टि..
3 महीने पहले
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