नादान मन में भरपूर उमंग है
जिंदगी की दौड़ से दूर मन मग्न है
उम्र बढ़ी समझदारी आयी
उमंगित मन में है, कुंठा कुछ समाई
गया बचपन आयी जवानी
बदले रस्ते और नई कहानी
अनल जाल है मन में पाया
नवविचारों को भष्म है पाया
टूटा मन कला से उजड़ा
न पाया है सुंदर मुखड़ा
मुसीबतों का जाल है ऐसा छाया
हाथ मेरे है कुछ न आया
क्या मेरा है मन कहता था
क्या में करता जाता हूँ
छोड़ दिये हैं मैंने सपने
छोड़ दिये हैं मैंने अपने
सपनों का संसार मिटालो
जिम्मेदारी का भर उठालो