विज्ञापन

मखमली बिस्तर पर भी चैन कहाँ मिला, शायद राहों ने कोई पुराना दर्द जगा दिया।

Sooba Lal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुझे गर्म हवाओं ने सताया है शायद,
        
                                                    
                            
मुरझाया चेहरा देखने की आदत नहीं मेरी।
कटीली आँखों में जो थकान के रेशे हैं,
बेवजह नहीं ये दर्द की लकीरें हैं।

रूखी-रूखी आवाज़ में नर्मियत खो गई,
लब खामोश हैं, आँखें मगर कहती हैं।
किसी दर्द ने छीनी है तेरी मुस्कान,
तेरी आँखें ही अब सारा राज़ कहती हैं।

पुष्प-सा कोमल कोई ज़ख्म मिला है तुझे,
फिर भी तूने उसे चुपचाप सह लिया।
दर्द को मुस्कान के पीछे छिपाकर रखना—
सच कहूँ, यही तेरी खूबी है।

मखमली बिस्तर पर भी चैन कहाँ मिला,
शायद राहों ने कोई पुराना दर्द जगा दिया।
तेरे हर दर्द को पढ़ लेती हैं मेरी आँखें,
तेरी खामोशी भी मुझसे कह जाती है।

तू कुछ कहे या न कहे, फर्क नहीं पड़ता,
तेरी पीड़ा मुझ तक पहले पहुँच जाती है।
तेरी आँखे,हरकतें और हाव भाव मुझसे छुपे नहीं,
पल पल की खबर मुझ तक छोड़ जाती हैं।
-सूबा लाल "अंजाना"
7 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

User

26 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

12570 कविताएं

View Profile

Sudhir Khatri

562 कविताएं

View Profile