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सत्य की सुगंध

Sooba Lal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सच्चाई वह सुगंध है, जिसकी खुशबू कभी जाती नहीं,
        
                                                    
                            
सत्य की पावन ज्योति है ये, जो कभी बुझ पाती नहीं।
लोहे की मजबूत जंजीर है, जो आसानी से कटती नहीं,
धरती की अटल शिला है सत्य, जो सहज ध्वस्त होती नहीं।

झूठ, छल और बेईमानी, सत्य के आगे टिकते नहीं,
कितने भी हों शक्तिशाली, सत्य के आगे झुकते यहीं।
सत्य का बीज उगने में कुछ वक्त जरूर लगाता है,
धीरे-धीरे जड़ें जमाकर, वटवृक्ष बन जाता है।

झूठ-फरेब की आग भले ही धू-धू करके जलती है,
सच्चाई की शीतल धारा चुपचाप ही राह बदलती है।
झूठ चमकता पल भर है1, फिर अंधकार में ढलता है,
सत्य कठिन राहों पर चलकर, मंजिल तक पहुँचता है।

सत्य की राह कठिन सही, पर साहस नहीं गँवाना है,
काँटों से घिरी राह पर भी, कदम बढ़ाते जाना है।
देर भले ही हो जाए, सत्य का मान घटता नहीं,
सच्चाई का दीप जलाने वाला कभी भीतर से हारता नहीं।

झूठ के महल ढह जाते हैं, सत्य की नींव हिलती नहीं,
वक्त बदलता रहता है, सत्य की महिमा मिटती नहीं।
धैर्य, विवेक और कर्म से सत्य का साथ निभाना है,
जीत भले ही देर से आए, सत्य का पथ अपनाना है।
-सूबा लाल 'अंजाना'
3 दिन पहले
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