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संगठन की शक्ति

Sooba Lal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कण-कण के संगठन से, वसुंधरा अति विशाल है,
        
                                                    
                            
बूँद-बूँद जल से सागर, खुद पर बड़ा निहाल है।
प्रकृति के कण-कण में ही, जीवन का विस्तार है,
वायु, अग्नि, जल और गगन से ही जीवन का सार है।

एक-एक वृक्ष से वन निर्मित, क्षिति से क्षितिज तक शान है,
जन-जन से संसार बना है, यही प्रकृति का ज्ञान है।
तिनका-तिनका जुड़कर देखो, छप्पर बनता महान है,
कण-कण मिलकर पर्वत बनता, यही प्रकृति का विधान है।

एक अकेला दीपक छोटा, फिर भी तम को हरता है,
दीप से दीप गर जलते जाएँ, अंधकार फिर डरता है।
एक अकेली चिंगारी भी, शोला बन सकती है,
एकता की शक्ति मिल जाय तो, दुनिया बदल सकती है।

तृण-तृण से रस्सी है7 निर्मित, बाँधे हाथी बलवान है,
एक-एक धागा जुड़कर देखो, वस्त्र बना महान है।
झाड़ू की हर सींक अकेली, कितनी कमजोर दिखाई,
मिलकर जब सब साथ खड़ी हों, शक्ति जगत ने पाई।

एक-एक ईंट से घर बनता, महल खड़ा हो जाता है,
एक अकेला मानव भी कब, सब कुछ कर पाता है?
मजदूरों के श्रम कि सच्चे है कि देखो, ऊँचा भवन बनाया है,
किसान, श्रमिक और जनशक्ति ने, भारत को सजाया है।

अक्षर मिलकर शब्द बनाता, शब्द से ग्रंथ महान है,
स्वर मिलते हैं गीत बनाते, गीत बने पहचान है।
हाथ मिले तो काम बनेगा, मन मिले सम्मान है,
कदम मिलाकर चलने वालों की, निश्चित होती आन है।

एकता हमारी ताकत है, संगठन हमारी ढाल,
चेतना हमारी ज्योति है, संघर्ष हमारा भाल।
अधिकार माँगने से पहले, जागो अपने ज्ञान से,
हक कोई देता नहीं जग में, मिलता है संगठन से।

जो बिखरा है वह कमजोर है, संगठित अजेय महान है,
जिसके भीतर चेतना जागी, उसके हाथ में ज्ञान है।
जाति-पाँति की दीवारों को, मिलकर आज गिराना है,
भेदभाव के अंधकार में, ज्ञान-दीप फिर जलाना है।

न कोई ऊँचा, न कोई नीचा, मानव सब समान है,
सम्मान से जीना हर मानव का, जन्मसिद्ध अधिकार है।
शिक्षा लेकर आगे बढ़ना, यही सफलता की राह है,
संविधान ने जो हक दिए हैं, उनको रखना याद है।

कलम हमारी शक्ति बने और, शिक्षा हमारी जान,
संगठन से जागे चेतना, बढ़े हमारा मान।
न्याय, समता और बंधुत्व से, सुंदर हो संसार,
भीम विचारों की मशाल लेकर, चलना बारंबार।

बाबा साहब ने हमें बताया, शिक्षा सबसे महान है,
शिक्षित बनो, संगठित होकर, संघर्षों में सम्मान है।
दबे-कुचले जन को जिसने, अधिकारों का ज्ञान दिया,
संविधान की शक्ति से सबको, मानव होने का मान दिया।

जिसने सदियों की बेड़ियों को, शब्दों से ललकारा था,
जिसने शोषित जन के जीवन में, आशा का दीपक धारा था।
जिसने कहा कि ज्ञान से बढ़कर, कोई नहीं हथियार है,
वो भीमराव हमारा नेता, भारत का आधार है।

जो न संगठित हुआ तो उसको, जानो वह बेजान है,
बिना एकता कुछ न हुआ है, यही भीम का ज्ञान है।
बिखरे पत्ते उड़ जाते हैं, आँधी के झोंकों में,
मिलकर वृक्ष बनें तो टिकते, सदियों के झंझावातों में।

एक हाथ से ताली न बजे, दो हाथों का मान है,
एक स्वर से गीत अधूरा, मिलकर बने महान है।
एक कदम से राह न बनती, कदम-कदम अभियान है,
जन-जन जब संगठित हो जाए, तब बदलता जहान है।

तुम मजदूर हो, तुम किसान हो, तुम ही देश की शान हो,
तुम विद्यार्थी, तुम नौजवान हो, तुम भारत की जान हो।
अपनी शक्ति पहचानो अब, अपनी नई उड़ान भरो,
शिक्षा, संगठन, स्वाभिमान से, जीवन में अरमान भरो।

नफरत की दीवारें तोड़ो, प्रेम का दीप जलाना है,
भाईचारे की राह पकड़कर, नया समाज बनाना है।
न्याय मिले हर व्यक्ति को और, सम्मान मिले हर प्राण को,
समता की गंगा बहा दें हम, भारत के हर इंसान को।

कण-कण से बनता ब्रह्मांड, बूँदों से सागर बनता है,
जन-जन जब संगठित हो जाए, इतिहास नया फिर बनता है।
ईंट-ईंट से भवन बने और, अक्षर से ग्रंथ महान है,
जनशक्ति जब जागृत होती, बदल जाता हिंदुस्तान है।

उठो, जागो, संगठित हो, यही समय की पुकार है,
शिक्षा, संघर्ष और संगठन ही, जीवन का आधार है।
हक की खातिर डटे रहो तुम, मत होना बेईमान,
भीम विचारों के पथ पर चलकर, ऊँचा करो स्वाभिमान।

जो बिखरेगा हार जाएगा, जो जुड़ जाएगा जीत जाएगा,
जिसके भीतर चेतना होगी, वह इतिहास बदल जाएगा।
एकता की मशाल जलाकर, अंधियारा मिटाना है,
भीम साहब के सपनों वाला, भारत हमें बनाना है।

जो न संगठित हुआ तो उसको, जानो वह बेजान है,
बिना एकता कुछ न हुआ है, यही भीम का ज्ञान है।
शिक्षित बनो, संगठित हो जाओ, संघर्षों का मान है,
न्याय, समता, बंधुत्व लेकर—यही हमारा अभियान है।

कण-कण में शक्ति छिपी है, बूंद-बूंद में जान है,
जन-जन की जब शक्ति मिले तो, बनता नया विधान है।
हम सबकी पहचान यही है, हम सबका सम्मान है,
एकता में शक्ति हमारी—यही भारत की शान है।

बिना एकता कुछ न हुआ है, यही भीम का ज्ञान है,
बिना संगठन कुछ न मिला है, यही समय का गान है।
शिक्षा हमारी ज्योति बने, संगठन हमारी जान है,
स्वाभिमान से जीना सीखो—यही हमारा अभियान है।

— सूबा लाल "अंजाना"
23 घंटे पहले
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