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ज़िंदगी—एक खुली किताब

Sooba Lal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ज़िंदगी एक किताब है,
        
                                                    
                            
जिसका हर पन्ना नया होता है,
हर सुबह एक नई कहानी,
हर शाम उसका अनुभव होता है।

कोरा पन्ना लेकर आते हैं,
लिखते-लिखते उम्र गुजरती है,
कभी हँसी के फूल खिलते हैं,
कभी आँखों से नमी उतरती है।

कहीं संघर्षों की काली स्याही,
कहीं सपनों के रंग भरे,
कहीं अपनों के मीठे बोल,
कहीं रिश्ते मन से दूर हुए।

कहीं सफलता का सूरज चमका,
कहीं असफलता की रात मिली,
कहीं कदमों को राह मिली तो
कहीं ठोकर बार-बार मिली।

हर ठोकर ने कुछ सिखलाया,
हर आँसू ने मन को धोया,
हर मुश्किल ने हिम्मत दी,
हर सुख ने जीवन को संजोया।

जो बीत गया, वह पन्ना है,
जो आने वाला, वह सपना है,
जो आज हमारे हाथ में है,
बस वही जीवन का अपना है।

कुछ पन्ने स्वर्णिम अक्षर बनते,
कुछ बन जाते गहरी सीख,
कुछ पन्ने मन को हँसाते,
कुछ दे जाते आँखों में नमी।

कितने चेहरे राह में मिलते,
कुछ अपने बन जाते हैं,
कुछ थोड़ी दूर साथ चलकर
चुपचाप दूर हो जाते हैं।

कोई बनता है जीवन का साथी,
कोई बन जाता प्रेरणा,
कोई देकर गहरी चोट हमें
बन जाता जीवन की चेतना।

माता-पिता के त्याग भरे पन्ने,
बचपन की मधुर कहानी हैं,
गुरु की सीख, पिता की मेहनत,
जीवन की अमूल्य निशानी हैं।

यौवन के पन्नों में सपने,
कर्मभूमि में संघर्ष मिला,
परिवार के पन्नों में प्रेम मिला,
अपनों का अनमोल साथ मिला।

कभी अपने हिस्से का सुख त्यागा,
कभी किसी का सपना पूरा किया,
कभी गिरकर फिर उठना सीखा,
कभी खुद को सबसे पीछे किया।

यही तो जीवन की दौलत है,
यही इसकी सच्ची कमाई है,
महलों से ज्यादा याद रहती
किसी के चेहरे की मुस्कान भाई है।

धीरे-धीरे पन्ने भरते हैं,
फिर उम्र किताब बन जाती है,
कर्मों की हर छोटी-बड़ी बात
उसमें दर्ज हो जाती है।

एक दिन जब अंतिम पन्ना
चुपचाप हमारे सामने आएगा,
तब धन-दौलत कुछ न पूछेगी,
बस कर्मों का हिसाब बताएगा।

किताब हमारी बंद हो जाएगी,
पर कहानी खत्म नहीं होगी,
हमने जो राह दिखाई होगी,
वही किसी की मंज़िल होगी।

इसलिए हर पन्ना ऐसा लिखो
जिस पर मन को गर्व रहे,
शब्द भले ही कम हों उसमें,
पर अर्थ बहुत गहरे रहें।

नफरत के शब्द मिटा देना,
प्रेम के अक्षर लिखते जाना,
जिस राह से तुम गुजरे हो,
उस राह में दीप जलाते जाना।

ज़िंदगी की इस अनमोल किताब में
हर दिन नया अध्याय लिखो,
जब अंतिम पन्ना आए सामने,
तो मुस्काकर कहना—
“मैंने जीवन को केवल जिया नहीं,
हर पन्ने को सार्थक किया है,
जो मिला उसे बाँट दिया,
जो सीखा उसे आगे दिया है।”
-सूबा लाल "अंजाना"
6 घंटे पहले
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