इंसानियत का कोई हिसाब नहीं होता,
इससे बड़ा कोई खिताब नहीं होता।
जो दर्द पराए का अपना समझता है,
उससे बड़ा कोई इंसान नहीं होता।
धन-दौलत से सब कुछ खरीदा नहीं जाता,
हर रिश्ते को पैसों से तोला नहीं जाता।
प्रेम और करुणा अनमोल खजाना हैं,
इनका बाजार में कोई भाव नहीं होता।
भूखे को रोटी, प्यासे को पानी देना,
गिरते हुए को हाथ बढ़ाकर उठा लेना।
बिना स्वार्थ जो दूसरों के काम आता है,
उसके पुण्य का कोई हिसाब नहीं होता।
किसी की आँखों में आँसू न आने देना,
दुखी हृदय को प्रेम से समझा देना।
दुनिया में सबसे बड़ा धर्म यही है,
इससे बड़ा कोई धर्म-ग्रंथ नहीं होता।
अमीरी-गरीबी का भेद मिटाना है,
हर मानव को मानव समझना सिखाना है।
नफरत की दीवारें गिराकर देखो,
प्रेम से बढ़कर कोई हथियार नहीं होता।
मंदिर-मस्जिद में माथा झुकाना अच्छा है,
पर दुखियों के आँसू पोंछना भी सच्चा है।
सेवा से बढ़कर कोई पूजा नहीं होती,
करुणा से बड़ा कोई भगवान नहीं होता।
सूबा लाल ‘अंजाना’ यही संदेश सुनाता है,
मानवता का दीप हृदय में जलाता है।
जीवन में सब कुछ खोकर भी जी सकते हैं,
इंसानियत खो जाए तो कोई संसार नहीं होता।
इंसानियत का कोई हिसाब नहीं होता,
इससे बड़ा कोई खिताब नहीं होता।
जो दूसरों के लिए जीना सीख जाता है,
उसके जीवन का कोई जवाब नहीं होता।
-सूबा लाल ‘अंजाना’