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हक़ यूँ ही नहीं मिलता

Sooba Lal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हमारे भाइयों को हक़ कहाँ से मिलता है,
        
                                                    
                            
न रोने से मिलता है, न ही प्यार से ये मिलता है।
जो हक़ चाहिए, उसे पाने के लिए,
संगठन और संघर्ष की राह चलना पड़ता है।

कभी सुना है तुमने किसी जननायक से—
शिक्षा, संगठन, संघर्ष से बल मिलता है।
बिखरे रहोगे तो आवाज़ भी दब जाएगी,
मिलकर चलने से तो हर हक़ हमारा मिलता है।

एकता के लिए नेता कोई चुनना होगा,
बिना नेतृत्व के कारवाँ भी कहाँ चलता है?
सही दिशा और सच्चे नेतृत्व के बिना,
संघर्ष का ऐसे परिणाम कहाँ मिलता है?

शिक्षा के लिए भी जागरूक होना होगा,
अपने अधिकारों का ज्ञान तो लेना होगा।
कलम की ताकत को तो,पहचाननी होगी,
तभी बदलती समाज की तस्वीर भी पूरी होगी।

अभी की स्थिति देखकर समझ जाओ,
अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता है।
हाथ से हाथ, कदम से कदम के मिलने पर
मुश्किल से मुश्किल कोई भी काम हो सकता है।

इसलिए मिलकर एक बार दम लगा डालो,
अपने भीतर के विश्वास को जगा डालो।
शिक्षित होकर के,एकता में तो रहना सीखो,
संघर्ष करने से कैसे हक मिलेगा तुम्हे।
-सूबा लाल "अंजाना"
एक महीने पहले
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