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घमंड की खासियत

Sooba Lal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            घमंड साथ रहकर भी साथ नहीं निभाता,
        
                                                    
                            
जैसे मुर्दा अकड़कर झुक नहीं पाता।
ऊँचा उठकर जो सबको छोटा दिखाता है,
वक्त आने पर वही अकेला रह जाता है।

घमंड की नींव पर रिश्ते टिक नहीं पाते,
अपने भी धीरे-धीरे दूर होते जाते।
ज्ञान हो, धन हो या पद का अभिमान,
घमंड कर देता है इंसान का पतन।

फूलों से सीखो, झुककर भी महकना,
पेड़ों से सीखो, फल देकर के झुकना।
नदी भी नीचे बहकर सागर में समाती,
विनम्रता ही सबके दिलों में जगह बनाती।

घमंड में इंसान अपनी औकात भूल जाता,
दूसरों के दर्द और जज़्बात भूल जाता।
समय का पहिया जब करवट बदलता है,
तब उसका हर अभिमान धूल में मिलता है।
-सूबा लाल ‘अंजाना’
एक घंटा पहले
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