आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

घमंड की खासियत

                
                                                         
                            घमंड साथ रहकर भी साथ नहीं निभाता,
                                                                 
                            
जैसे मुर्दा अकड़कर झुक नहीं पाता।
ऊँचा उठकर जो सबको छोटा दिखाता है,
वक्त आने पर वही अकेला रह जाता है।

घमंड की नींव पर रिश्ते टिक नहीं पाते,
अपने भी धीरे-धीरे दूर होते जाते।
ज्ञान हो, धन हो या पद का अभिमान,
घमंड कर देता है इंसान का पतन।

फूलों से सीखो, झुककर भी महकना,
पेड़ों से सीखो, फल देकर के झुकना।
नदी भी नीचे बहकर सागर में समाती,
विनम्रता ही सबके दिलों में जगह बनाती।

घमंड में इंसान अपनी औकात भूल जाता,
दूसरों के दर्द और जज़्बात भूल जाता।
समय का पहिया जब करवट बदलता है,
तब उसका हर अभिमान धूल में मिलता है।
-सूबा लाल ‘अंजाना’
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर