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गरीबी और अमीरी का सच

Sooba Lal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गरीबी इंसान की कमर तोड़ देती है,
        
                                                    
                            
अमीरी इंसान को इंसानियत से दूर कर देती है।
गरीबी में सपने भी दम तोड़ जाते हैं,
अमीरी में अपने भी पराए हो जाते हैं।

गरीबी में पल पल का हिसाब होता है,
दो जून की रोटी पाना भी एक ख्वाब होता है।
कभी भूख से लड़ते हैं, कभी हालात से हारते हैं,
गरीब अपने आँसू भी छिपाकर गुजारा करते हैं।

अमीरों के महलों में सुख-सुविधाएँ हजार हैं,
फिर भी कई दिलों में रिश्तों की दरकार है।
धन-दौलत के नशे में कुछ लोग ऐसे खो जाते हैं,
अपने ही लोगों के दर्द से अनजान हो जाते हैं।

गरीबी कोई अपराध नहीं, न अमीरी कोई गुनाह है,
इंसान की असली पहचान तो उसके कर्मों की राह है।
अमीर वही है जिसके हृदय में प्रेम का वास है,
दीन-दुखियों की सेवा में जिसे मिलता उल्लास है।

न धन से कोई छोटा है, न पद से कोई बड़ा,
इंसानियत से बढ़कर नहीं कोई रिश्ता खरा।
गरीब के दर्द को समझो, अमीर का मान करो,
भेदभाव की दीवार गिराकर मानवता का सम्मान करो।

धन आए तो मन में कभी अभिमान न आने देना,
कष्ट आएँ तो हौसलों को कभी टूटने न देना।
दौलत से नहीं, व्यवहार से दिल जीते जाते हैं,
इंसान वही हैं ' अंजाना 'जो इंसान के काम आते हैं।
-सूबा लाल ' अंजाना '
7 घंटे पहले
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