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बाढ़ का राष्ट्रीय मंजर

Sooba Lal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उत्तर में गंगा का उफान है भारी,
        
                                                    
                            
वाराणसी, पटना में डूबी है क्यारी।
सड़कें बनीं अब हैं गहरे समंदर,
लोगों के चेहरे हैं डरे सहमे अंदर।

पूर्वोत्तर में ब्रह्मपुत्र हुंकार रहा है,
असम का गाँव–गाँव पुकार रहा है।
कछार की बस्तियाँ जल में समाई हैं,
बचाव हेतु नौकाएँ भी पहुँच न पाई हैं।

बिहार की कोसी फिर से है बिफरी,
सीतामढ़ी, सुपौल की राहें जमीं से उखड़ी।
खेतों में धान की जगह भरा पानी है,
गाँव-गाँव बह रही त्रासदी पुरानी है।

मध्य प्रदेश में नर्मदा है उमड़ी,
होशंगाबाद की बस्तियाँ हैं डूबीं।
पश्चिम में बेतवा, चंबल उफानी है,
आशियाने बने हैं मटमैले पानी हैं।

दक्षिण में कावेरी का रूप विकराल है,
कर्नाटक, तमिलनाडु में हाल बेहाल है।
चामराजनगर की बस्तियाँ हैं तर गईं,
धान की बालियाँ मिट्टी से हैं भर गईं।

महाराष्ट्र में गोदावरी ने मारा है डंका,
नाशिक में घर-आँगन डूबा है कंका।
पशु, अनाज और सपनों की सारी डोर,
सब कुछ लील गई बाढ़ की भयंकर ठौर।

पश्चिम बंगाल में दामोदर की धार बहे,
मालदा, हावड़ा की छतें डगमगाय रहें।
लोग छतों पर बैठे हैं उम्मीद लगाए,
राहत की नावें कब उनकी ओर आएं।

हर दिशा से उठ रही यही पुकार है,
हे सरकार, देखो जनता की दरकार है।
नदियों के कोप से हाहाकार मचा है,
भारत का जनजीवन पानी में सिमटा है।
-सूबा लाल ”अंजाना”
11 महीने पहले
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