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हर चेहरा सब कुछ नहीं कहता,

Sooba Lal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आँसू कब निकल आते हैं,
        
                                                    
                            
किसको इसकी खबर होती है?
इनकी भी अपनी भाषा है,
इनकी भी अपनी व्यथा होती है।

दर्द हृदय में बढ़ जाता है,
शब्द कहीं खो जाते हैं,
मन की गहरी चोटों से फिर,
आँसू बाहर आते हैं।

माँ की आँखें नम हो जातीं,
जब बेटा घर से जाता है,
बेटी की विदाई के पल में,
हर दिल भर-भर आता है।

प्रेम मिले तो नयन चमकते,
मिलन में आँसू आते हैं,
बरसों बाद मिलें जब अपने,
नयन खुशी बरसाते हैं।

बिछड़ने का दर्द हो जब भी,
आँखें सब कुछ कह देती हैं,
जो बातें होंठ नहीं कहते,
आँखें उनको कह देती हैं।

अपनी गलती समझ में आए,
पश्चाताप भी रुलाता है,
मन का मैल धुल जाए जब,
इंसान स्वयं को पाता है।

कभी खुशी में आँसू छलकें,
कभी सफलता रुलाती है,
वर्षों की मेहनत की कीमत,
एक बूँद समझाती है।

किसी गरीब की पीड़ा देखो,
किसी असहाय की आँखें पढ़ो,
उनके आँसू प्रश्न कर रहे—
कब जागोगे? कुछ तो करो!

आँसू कोई हार नहीं हैं,
ये मन की सच्ची आवाज़ हैं,
सूखे होंठ भले चुप रहें,
नयनों में छिपे हज़ार राज़ हैं।

लेकिन इतना भी मत रोना,
हिम्मत ही बह जाए साथ,
दर्द को अपनी शक्ति बनाकर,
फिर बढ़ना लेकर नई आस।

आँसू ईश्वर का वरदान हैं,
मन का बोझ उतारते हैं,
कभी तोड़ते भीतर से ये,
कभी हमें सँवारते हैं।

इसलिए इन्हें न समझो केवल,
दुख की कोई निशानी,
हर आँसू के पीछे छिपती,
एक जिंदगी की कहानी।

आँसू पढ़ना सीखो जग में,
हर चेहरा सब कुछ नहीं कहता,
किसी की आँखों का सन्नाटा,
मन का दर्द छिपाए रहता।
-सूबा लाल “अंजाना”
2 घंटे पहले
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