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चैत्र नवरात्रि: नारी शक्ति की स्तुति

Sonal dubey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नव-अंकुरित प्रभात में, नव चेतना का संचार,
        
                                                    
                            
चैत्र की पावन बयार में, जागे शक्ति अपार।
मृदुल मुस्कान सी वो, कभी ज्वाला सी दहकर
नारी के हर रूप में, बसता दिव्य विस्तार।

शैलपुत्री सी अडिग, धैर्य की वो मूरत,
ब्रह्मचारिणी तपस्विनी, साधना की सूरत।
चंद्रघंटा की घनघोर ध्वनि, करे भय का संहार,
कूष्मांडा की सृष्टि-ज्योति, उज्ज्वल करे संसार।

स्कंदमाता की करुणा, वात्सल्य का विस्तार,
कात्यायनी का पराक्रम, अन्याय पर प्रहार।
कालरात्रि की विभीषिका, अंधकार का अंत,
महागौरी की निर्मलता, श्वेत शांति का संत।

सिद्धिदात्री की कृपा से, पूर्ण हो हर काम,
नारी में ही सन्निहित, सृष्टि का हर धाम।
वह सृजन, वह संहार, वह माया, वह ज्ञान,
उसके चरणों में नतमस्तक, सारा यह जहान।
6 महीने पहले
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