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सावन की हरियाली

Sima Kedia

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सावन की हरियाली छाई,रिमझिम बारिश की फुहार,
        
                                                    
                            
घनघोर बादलों के गर्जन से ,बारिश ने पकड़ी रफ्तार।

कदंब की डाल पर कोयल की,कुहु कुहु की सुने झंकार,
ठंडी ठंडी चले पुरवाई,,मौसम हुआ बेहद खुशगवार।

मेघों से आच्छादित बादल, घुमड़ घुमड़ कर करते शोर,
दिल जोर शोर से धड़के, हृदय में उठती मिलन की हिलोर।

प्रिया मिलन की तड़प हुई, आलिंगन को दिल बेकरार,
मिलना अभी मुश्किल है,साजन दे रहें हैं तड़प अपार।

दीवानगी कहें इसे मिलन की ,ये कैसी खुमारी छाई,
चित्त भी बदहवास धड़क रहा,बदन ने ली अंगड़ाई।
-सीमा केडिया
एक महीने पहले
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