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जय हिंद की सेना

Sima Kedia

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            Gen G शब्द को नाहक ,क्यूँ करती बदनाम,
        
                                                    
                            
बेवजह बखेड़ा खड़ा कर ,माहौल मत बिगाड़ ।
देश और सेना को चाहती ,हो परेशानी में डाल,
अपने घूमने फिरने के शौक में ,नहीं हो खलल।

बिल्कुल मत दिखा, अपने सीमित पैसों का रुआब,
तेरे जैसे यूँ ही घूमते मिल जायेंगे हजारों हजार।
माता पिता के पैसों पर कर रही तुम मस्ती मौज,
सवाल उठा रही हो, अपने ही देश की फौज पर।

कारणवश या जो भी हो उन्होंने बंद किया था रास्ता,
दखल अंदाजी करने का, नहीं हो किसी का वास्ता।
देश के प्रहरियों के कारण ही, चैन की सांस लेते हैं,
होली हो या दिवाली,अन्य त्योहार आनंदपूर्वक मनाते हैं।

इनके सजगता और कर्त्तव्य निष्ठा, के बल पर ही,
हमारी सीमा पर ,कोई कब्जा नहीं कर सकता।
इनके घरवालों के बारे में, जरा तुम सोच के देखो,
कैसे इनका परिवार, हर खुशी और गम झेलता।

सेना के कामों पर सवाल, उठाना कहाँ तक है जायज,
कुछ देशवासियों की मंशा ,यही करना काम नाजायज।
आंदोलन और बरगलाना ,इसका हो गया है अभी चलन,
ऐसे लोगों को मिले सजा,करना होगा इनका दमन।

- सीमा केडिया
22 घंटे पहले
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