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हिंदुओं की दुर्दशा

Sima Kedia

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मन आहत है देखकर ,
        
                                                    
                            
हिंदुओं जनसंख्या अधिक होने के बावजूद भी
हिंदुओं का चुनचुनकर
कत्ल हो रहा है भारत में
चाहे बंगाल का मुर्शिदाबाद हो,
या कश्मीरी हिंदू पंडित हो
या पहलगाम में सैलानी हो।

आजादी के समय में भी
बंगाल में जो दंगा हुआ,
उसमें लाखों हिंदुओं का कत्ल हुआ।
चिन्हित किया गया घर
हिंदुओं का मुर्शिदाबाद में,
धर्म पूछकर, पेंट खोलकर
देखा गया पहलगाम में
कश्मीर में हिंदू पंडितों को
और फिर कत्लेआम को दिया अंजाम।

हर युग में होते जयचंद
मुर्शिदाबाद में पड़ोसी ने ही मार डाला।
कश्मीर में पड़ोसी ने ही
पंडितों की खबर आतंकियों तक पहुंचाई।
पहलगाम में भी दो स्थानीय की मदद से
हिंदुओं का वीभत्स नरसंहार हुआ।
केरल में भी सहेली ने ही
हिंदू लड़कियों को जाल में फँसाया।

हमेशा हमारे हिंदू धर्म को
निशाना बनाया गया
चाहे औरंगजेब हो या बाबर,
चाहे गाँधी हो या नेहरू।
चाहे कांग्रेस हो या अलगाववादी,
शिकार तो हिन्दू ही हुए।
हमारे मंदिरों को तोड़ा गया, लूटा गया।
नारियों की अस्मत लूटी गई।
तभी तो इतना बड़ा जौहर
राजस्थान की वीरांगनाओं ने किया

पता नहीं हमें सब शिकार बनाते,
मन बहुत क्षुब्ध है,
कब इन जेहादियों को बुद्धि आयेगी।
कब ये नरसंहार खत्म होगा।
-सीमा केडिया
एक वर्ष पहले
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