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शहर में गाँव

Siddharth Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आदमी का प्रेम लौटे, अपनापन, लगाव लौटे
        
                                                    
                            
मुमकिन हो कि शहर में अब गांव लौटे

पीपल का पेड़ लौटे , कुआँ लौटे
तहजीब लौटे कि नमस्ते, दुआ लौटे
संजीदा पोखरा और चकनाली उसकी
नीचे नीम के आदमियों से घिरा अलाव लौटे
मुमकिन हो कि शहर में अब गांव लौटे

जामुन का पेड़ और शिवाला लौटे
अपनो के साथ बैठ के निवाला लौटे
घर की संजीदगी लौटे
रिश्तों में पुश्तैनी ठहराव लौटे
मुमकिन हो कि शहर में अब गांव लौटे

क्षीर लौटे, पूजा लौटे और बख़ीर लौटे थे
खेल - खेल में लकड़ी की शमशीर लौटे
जो बस गए अरसे से शहर में
उनके भी गांव की तरफ पाँव लौटे
मुमकिन हो कि शहर में अब गांव लौटे

चमक सड़क, शोहरत और इमारत की
पैसे के बल बड़ा बनने के चाहत की
इन इच्छाओं पर थोड़ा अंकुश लगे
फिर आदमी के अंदर का भाव लौटे
मुमकिन हो कि शहर में अब गांव लौटे
-सिद्धार्थ गोरखपुरी
5 महीने पहले
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