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बहुत हैं.....

Siddharth Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लड़का, बेटा, भाई, मित्तर
        
                                                    
                            
मेरे वैसे किरदार बहुत है
चचा बगल के कहे किसी से
लड़का जिम्मेदार बहुत है

त्याग सुखों को घर से निकला
हौसला रस्ते भर पिघला - विघला
दुनियां देख रहा रस्ते भर
खुला रहा पूरी रात को जंगला
मां की आँखों के ओझल पानी में
सच में यारों चमत्कार बहुत है

रस्ते भर आए घर की यादें
गांव - मोहल्ला डगर की यादें
क्षण भंगुर सी होती हैं वैसे
अक़्सर ही रहबर की यादें
इहाँ कोई अपना ना दिखता
गाँवों में मेरे यार बहुत हैं

विदा हुआ हूँ कमाने को
अब आग लगेगी ताने को
माँ का दिया चदरा है साथ में
ओढने और बिछाने को
सहेज रखेंगे सामानों को भी
बैग में घर के अख़बार बहुत है


बाणी से साथ दिया सबने
साथ दिया केवल रब ने
उँगलियाँ अनायास चिढ़ाने लगीं
ज़ब हीत लगा अपने गिनने
चढ़ते- ढलते जीवन में
अगणित अद्भुत समाचार बहुत है
-सिद्धार्थ गोरखपुरी
10 महीने पहले
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