विज्ञापन

बाद

Siddharth Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बे - इंतहाँ कश्मकश कुछेक जद्दोजहद के बादl
        
                                                    
                            
मैं बेशक हार जाता हूँ एक हद के बादll

मेरी लम्बाई महज इंचटेप की जद तक न देख,
मैं थोड़ा और ऊँचा हूँ मेरे कद के बाद l

मैं विसरा हूँ भूलाए जाने के दरमयान,
लोग याद ही कहाँ रखते हैं एक मक़सद के बाद l

हद में रहना मुनासिब है जिंदगी की डगर में यारों,
अधिकार होता कहाँ है कभी सरहद के बाद l

नरमी जायज है बड़प्पन की मां जैसी,
आदमी... आदमी रहता कहाँ है मद के बाद l

नएपन का आदी भी नए से रुसवा हो जाता है,
फिर वो पाना छोड़ देता है जायद के बाद l
-सिद्धार्थ गोरखपुरी
एक वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all