कितना मुश्किल है ,
"जाति" के इस फंदे पर लटक जाना
इस मौत भरी जिंदगी को बिताना
कितना मुश्किल है,
इस भरी दुनिया में तुम्हें खो पाना
खो कर भी, मिलने की एक झूठी उम्मीद न रख पाना
कितना मुश्किल है ,
इन किताबो में तुम्हें कहीं कलमबद्ध कर पाना
कभी कविता तो कभी कहानियों में छुपाना
कितना मुश्किल है,
इस अमित सत्य को समझ पाना
कभी दुनिया तो कभी खुद को बहलाना
कितना मुश्किल है,
"जाति" के इस फंदे पर लटक पाना
इस मौत भरी जिंदगी को बिताना
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