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एक दौर मेरा भी

shubhanjali nishad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            परेशानियां जरा मेरी आँखों से ओझल हो जाओ,
        
                                                    
                            
मेरा सर दर्द से फट रहा है कोई मेरे निकट न आओ।

बेचैनी उदासियां जरा तुम भूल जाओ,
खामोश पलों में डर कर मत घबराओ।

माना कोई नहीं है तुम्हारे पास तुम्हारा अपना,
ये ख्याल तुम अपने मन में बिल्कुल मत बैठाओ।

जरा उगते हुई सूरज की लालिमा से पूछ आओ,
तुम गंगा किनारे बहती लहरों संग मुस्कुराओ।

एक दौर फिर लौटकर आएगा तुम्हारा,
ए- जिन्दगी मुझे हराकर तुम मत इठलाओ।
3 घंटे पहले
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