परेशानियां जरा मेरी आँखों से ओझल हो जाओ,
मेरा सर दर्द से फट रहा है कोई मेरे निकट न आओ।
बेचैनी उदासियां जरा तुम भूल जाओ,
खामोश पलों में डर कर मत घबराओ।
माना कोई नहीं है तुम्हारे पास तुम्हारा अपना,
ये ख्याल तुम अपने मन में बिल्कुल मत बैठाओ।
जरा उगते हुई सूरज की लालिमा से पूछ आओ,
तुम गंगा किनारे बहती लहरों संग मुस्कुराओ।
एक दौर फिर लौटकर आएगा तुम्हारा,
ए- जिन्दगी मुझे हराकर तुम मत इठलाओ।