लफ्ज़ों का इस्तेमाल जब कम हो जाता है,
तब दूरियाँ बढ़ जाती हैं और प्रेम घट जाता है।
फिर टूटा दिल जुड़ने में बहुत वक़्त लगता है,
जुड़ भी जाए तो जख़्म कभी नहीं भरता है।