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नासमझ हैं जो

Shreyasi Satish

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब उनकी उम्मीदों पर हम खरे नहीं उतरते,
        
                                                    
                            
तो उनकी महफ़िल में भला कब तक रहते।

अपनी मर्ज़ी से कहाँ सबकुछ होता है दुनिया में,
इख़्तियार होता तो हम भी सिर्फ़ हँसते रहते।

तोहमत लगाने से पहले लाज़िम है हक़ीक़त जानना,
चाहत सच की होती तो क़यास नहीं लगाते।

नासमझ हैं जो, गुमराह न करें किसी को वो,
दिल टूट जाता है ऐसे, वो क्यूँ नहीं समझते।
3 महीने पहले
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Manju Sharma

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