विज्ञापन

कोई ऐसा हमें भी हमदर्द मिल जाए

Shreyasi Satish

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कोई ऐसा हमें भी हमदर्द मिल जाए,
        
                                                    
                            
जो आकर मेरे हर दर्द की दवा कर जाए।

भरोसा उस पर हो मुझे ख़ुद से भी बढ़कर,
उसे भी मुझ पर मुकम्मल यकीं आ जाए।

वो अपने रंज-ओ-ग़म रख दे मेरे दामन में,
मुझे भी रोने को उसका काँधा मिल जाए।

पकड़ कर हाथ उसका मैं छू लूँ फ़लक को,
वो हर क़दम पर हौसला मेरा बढ़ाता जाए।

न आए कभी कोई रंजीश दरमियाँ हमारे,
रिश्ता हमारा वफ़ा की मिसाल बन जाए।

लिखूँ मैं उसकी तारीफ़ अपनी ग़ज़ल में,
जिसे पढ़ के उसका चेहरा खिल-खिल जाए।
2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Adv DK Kanojiya

71 कविताएं

View Profile

Suresh Kumar

579 कविताएं

View Profile