विज्ञापन

शिव का तांडव

Shreya Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            डम-डम डमरू नाद उठा,
        
                                                    
                            
हर-हर महादेव पुकार।
जटा झुकी तो गंग बह चली,
डोला सारा यह संसार।

रुद्र बने जब नाथ हमारे,
काँपे नभ, पर्वत, भू-धाम।
त्रिनयन से ज्वाला बरसी,
भस्म हुआ हर झूठा नाम।

भाल सुशोभित चंद्र सुहाना,
कंठ सजे विषधर का हार।
भस्म-विभूति तन पर दमके,
रुद्र रूप अपार, अपार।

धा-धिन... धा-धिन... डम-डम बाजे,नाचे शिव अविराम।
एक चरण से जन्म सजे,
दूजे से विश्राम।

तिनका-तिनका अहं झरे जब,जागे अंतर का विश्वास।
तांडव केवल प्रलय नहीं है,
जीवन का नव मधुमास।

नंदी झूमें, गण मुस्काएँ,
देव करें जय-जयकार।
भूत-पिशाच भी भूलें भय को,
सुनकर शिव का हुंकार।

काल स्वयं चरणों में ठहरा,
मृत्यु करे प्रणाम।
महाकाल की महिमा आगे,
झुक जाए हर धाम।

डम-डम डमरू गूँज रहा है,
ॐ की पावन तान।
शिव के तांडव में ही बसता,
सृष्टि का नव-निर्माण।

आओ मन के विष को त्यागें,
त्यागें क्रोध, विकार।
शिव सा निर्मल हृदय सजाएँ,
यही सच्चा श्रृंगार।

डम-डम... डम-डम... नाद अमर है,अनहद जिसकी चाल।
शिव का तांडव गाता जग,
हर-हर शंभु! महाकाल!
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all