अंधियारे में ज्योत जलाई, माँ ने सृष्टि मुस्काई,
अपनी दिव्य हँसी से माँ ने, जग में धूप खिलाई।
तेज तुम्हारा सूरज जैसा, महिमा अपरम्पार,
तेरी कृपा से माँ खिलता है, जीवन का संसार।
आठ भुजाओं में शक्ति लेकर, जग का भार सँभालो,
भटके मन को राह दिखाकर, हर संकट को टालो।
दुख की धूप सताए जब भी, बनकर छाया आना,
टूटे मन के सूने आँगन, खुशियों से भर जाना।
मन में साहस, हृदय में श्रद्धा, आँखों में विश्वास,
माँ तेरे चरणों में मिलती, हर पीड़ा को आस।
तेरे नाम की ज्योत जले तो, मिट जाए अँधियारा,
तेरी कृपा से माँ सँवर जाए, जीवन हर पल हमारा।
जय कूष्माण्डा, जगदम्बे माँ, महिमा तेरी न्यारी,
तेरे चरणों में अर्पित माँ, दुनिया ये हमारी।