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वक्त ने बनाया होगा बुतदिल मुझे

Shreedhar Editors,

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वक्त ने बनाया होगा इस तरह बुतदिल मुझे,
        
                                                    
                            
वरना इन गुलाबों में तो हरे काँटे भी न थे।

पूरी भीड़ को अपना समझने की आदत रही,
हमने तो अपने पराए कभी छाँटे भी न थे।

न मालूम उसे मेरा दर्द-ओ-ग़म कैसे पता चला,
मैंने अपने दर्द कभी किसी में बाँटे भी न थे।

मौत हौले-हौले चुपके-चुपके छीन ले गई साँसें,
साँसों को बाँधने रोकने के कहीं खँूटे भी न थे।
9 घंटे पहले
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