चंद फूल भेजे हैं तुम्हारे वास्ते,
पंखुड़ियांँ मेरी हैं रंग तुम्हारे हैं।
साखों से जो ये बूंदें टपकती हैं,
इनमें जीवंत प्रवाह तुम्हारे हैं।
माली मैं हूँ हरियाले गुलशन का,
ये तितलियांँ, ये भौंरे तुम्हारे हैं।
ठहर जाता जीवन फूलों का,
पुष्प दल मेरे, पराग तुम्हारे हैं।
मल्हारी सुबहें सावन भादौ की,
और रातों में, सपने तुम्हारे हैं।
संभाल के रखिए इन पंक्तियों को,
ये हुनर, सिर्फ़ हमारे तुम्हारे हैं