खून से सींची धरती ये ,
तब जा कर चैन आया ।
आज भी वीर शहीदों पर ,
आंसू भर नैन आया ।।
हर क़ौम की भारत माता ,
यहां बहती यमुना गंगा ।
वो गोली खाकर गिरते ,
पर लेकर चले तिरंगा ।।
जिस दिन मिली आजादी ये,
घर-घर शुभ दिन रैन आया ।
खून से सींची धरती ये ,
तब जा कर चैन आया ।।
शहीदों के कफन से ही ,
तिरंगे का मान बढ़ा ।
नियम और सम्मान से ही ,
तिरंगे का शान बढ़ा ।।
सही-सही फहराये ध्वज पर ,
बलिदानी बेचैन आया ।
खून से सींची धरती ये ,
तब जा कर चैन आया ।।