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वन्देमातरम

Shivsagar Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक कविता वीर जवानों पर
        
                                                    
                            

नभ में जल में नग पर खेल रहे जो खून की होली दुश्मन को मार भगाकर खाते हैं सीने पर गोली

घर द्वार छोडके डटकर सरहद पे पहरेदारी जो करते।
लिए तिरंगा हाथ में लड़ते और वन्देमातरम कहते।

नमन कर रहा हूँ मैं दिल से ऐसे वीर जवानों को।
जिनकी गाथाएं मैं गाउँ पढ़कर के बलिदानों को।

आभाओं की लट से जिनके कण कण भी वंदन करते
लिए तिरंगा हाथ मे लड़ते और वन्देमातरम कहते।

दुआ है जिन पर मात-पिता की घरवाली का है प्यार। राखी में रखकर है भेजी बहना खुशियों का संसार।

बेटा जिनका अब पूछ रहा है मां पापा कहां है रहते।
लिए तिरंगा हाथ मे लड़ते और वन्देमातरम कहते ।

हिन्द में बहतीं सारी नदियां शौर्य है जिनका गातीं।
हिमगिरि से द्रविण,बंग तक सबके मन को हैं भातीं।

लद्दाख से लेकर सियाचीन भी प्रणाम है उनको करते।
लिए तिरंगा हाथ मे लड़ते और वन्देमातरम कहते।

शिवसागर सहर


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