हम हुए बदनाम तुम्हारी चाहत में,
ये कैसा इल्जाम तुम्हारी चाहत में।
जब से मुझको छोड़ तू हमसे दूर हुई,
गा रहा सुबो- शाम तुम्हारी चाहत में।
ख्वाबों का इक घर बसाई थी मगर,
हो गया नीलाम तुम्हारी चाहत में।
पढ़ना-लिखना छोड़ दिया उस कॉलेज से
अब पी रहा हूँ जाम तुम्हारी चाहत में।
~शिवसागर"सहर"
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